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कारसेवकों पर गोली कांड की सुनवाई पांच दिसंबर को

Supreme Court

नई दिल्ली। अयोध्या मे 1990 में कार सेवकों पर गोली चलाने के मामले मे यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट 5 दिसंबर को सुनवाई करेगा। यह मामला मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली उसी पीठ के सामने सुनवाई के लिए लगा है, जिसमें राम जन्मभूमि वाला केस लगा है। राणा संग्राम सिंह ने वकील विष्णु शंकर जैन के जरिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मुलायम सिंह के 2014 में एक जनसभा में दिए गए बयान को आधार बनाया है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में पहली बार मंगलवार पांच दिसंबर को सुनवाई के लिए आ रही है।

दाखिल याचिका में कहा गया है कि 6 फ़रवरी 2014 को मैनपुरी जिले में आयोजित एक जनसभा में मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि उनके आदेश पर 1990 में पुलिस ने अयोध्या में कार सेवकों पर गोली चलाई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस बयान के बाद उसने लखनऊ पुलिस में मुलायम सिंह के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगाई थी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने लखनऊ की निचली अदालत में मुलायम सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए याचिका दाखिल की थी, लेकिन निचली अदालत ने याचिका ख़ारिज कर दी थी।

इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। लेकिन हाईकोर्ट ने भी 3 मई 2016 को याचिका ख़ारिज कर दी। हाईकोर्ट से याचिका ख़ारिज होने के बाद अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दाखिल की है। वक़ील विष्णु शंकर जैन के मुताबिक याचिका में क़ानूनी सवाल उठाया गया है कि क्या मुख्यमंत्री भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दे सकता है? अगर हां तो किस कानूनी प्रावधान के तहत वह ऐसा आदेश दे सकता है। सवाल यह भी है कि क्या पुलिस को भीड़ पर गोली चलाने का अधिकार हैं? ज्ञात हो कि 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए हजारों कार सेवक वहां जमा हुए थे। जिसके बाद पुलिस ने भीड़ पर गोलियां चलाई, जिसमें कई कारसेवकों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।

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