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केंद्र सरकार पर भड़के गैर दलित संगठन, अस्तित्व बचाने उतरेंगे सड़को पर

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गाजीपुर। एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा एफआईआर दर्ज होते ही तत्काल गिरफ्तारी हेतु अध्यादेश के खिलाफ आज गैर दलित संगठनों ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन कर जिलाधिकारी समेत पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौपा। जिसमे इस अध्यादेश का विरोध किया गया, वंही अध्यादेश के विरोध में 10 अगस्त को सायं 4:30 पर गांधीपार्क से कचहरी तक मशाल जुलूस निकालने का निर्णय लिया गया।

वोट की भूखी है सरकार

क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने कहा कि वोट बैंक की भूखी, अंधी सरकार द्वारा यह काला कानून लाया जा रहा है, जिसको लोकसभा में पारित भी किया जा चुका है। राज्यसभा में पारित होने के बाद यह कानून का रूप ले लेगा, जिसको कतई बर्दाश्त नही किया जाएगा। प्रश्न अब सवर्णों और पिछडो के अस्तिव का है, दलित प्रेम में अंधी सरकार 22.5% के चक्कर मे 77.5% के साथ घोर अन्याय करने पर आमादा है। वोट की भूख में कोई भी संसद में बोलने को तैयार नही भले ही आने वाली नस्लें तबाह क्यो न हो जाये इस काले कानून से।

सड़क पर उतरने को होंगे बाध्य 

भूमिहार महासभा के महासचिव अधिवक्ता मारुती राय ने कहा कि जनता की अदालत से बड़ी कोई अदालत नही, तो 77.5% की जनसंख्या ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए एक मंच पर आ कर इसका पुरजोर विरोध करेगी। इसी क्रम में आज राष्ट्र के चौथे स्तम्भ माने जाने वाली आप सभी सम्मानित मीडिया के माध्यम से सभी गैर दलित बंधु आज वोट की भूखी, अंधी और बहरी केंद्र सरकार को यह चेतावनी दे रहे है कि यदि यह काला कानून वापस नही हुआ तो हम सब सपरिवार सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे।

विरोध न करने वाले सांसदों को जनता सिखाएगी सबक

यादव महासभा के अधिवक्ता लल्लन यादव ने कहा कि न्यायालय के विद्धवान न्यायाधीशों से भी विद्वान हो चुके पांचवी फेल लोग भी अब संसोधन की बात करते है। दलित उत्पीड़न के 90 फीसद मामले फर्जी पाए जाते है। सरकारी आर्थिक सहायता को पाने एवं ईष्या के कारण इस एक्ट का लोग दुरपयोग करते है और बाद में मोटी रकम ले मुकद्दमे वापस भी ले लेते है, इसको कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। संसद में इसका विरोध न करने वाले सांसदों को जनता सबक सिखाएगी।

अनदेखी पड़ेगी महँगी

कुशवाहा महासभा के सुनील कुशवाहा ने कहा कि मै तो स्वम इसका भुक्तभोगी हु। अवैध निर्माण के विरोध पर दलित पडोसी द्वारा पूरे मोहल्लेवासियों पर फर्जी एससी/एसटी के तहत फसा दिया गया, जो विवेचना में शुन्य पाया गया। इसपर भी उस दलित परिवार का पेट नहीं भरा और एक के बाद एक करके चार फर्जी मुक़दमे लिखा डाले। हाईकोर्ट ने भी माना की एक ही तरह की घटना को बस समय बदल बदल दर्शाया गया है और विद्वान न्यायाधीशों द्वारा दलित परिवार को तलब कर लिया गया पर वे आज तक भाग रहे है। इसमें कितनी परेशानी और यातना झेलनी पड़ी मुझसे बेहतर और कोई नहीं समझ सकता। हम सबकी अनदेखी केंद्र सरकार को बहुत महँगी पड़ने वाली है।

गिरफ्तारी में इतनी जल्दीबाजी क्यों?

पाल महासभा की नेत्री विभा पाल ने कहा कि यदि किसी के भी द्वारा दलित उत्पीड़न किया जाता है तो वह निश्चय ही शर्मनाक है पर जाँच तक गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए, हो सकता है की वह दलित द्वेष या लालच वश ऐसा कर रहा हो।

समर्थक है पर अंध नहीं

चौधरी महासभा के श्याम चौधरी ने कहा कि वे भले ही भाजपा की राजनीती करते हो पर इस मुद्दे पर पर केंद्र सरकार के इस फैसले से जरा सा भी सहमत नहीं है। वे इसका पुरजोर विरोध करते है, जांच तक गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए। हम सभी समर्थक है पर अंधे और बहरे नहीं।

90 फीसद मामले होते है फर्जी

पठान महासभा से आये अधिवक्ता खैरुल इमाम ने कहा कि न्यायलय में आने वाले दलित उत्पीड़न के सभी मुकद्दमों को वे गौर से देखते है, ज्यादातर फर्जी मिलते है। व्यापारी नेता वंही असलम खान ने कहा कि यदि यह काला कानून हम सब पर थोपा गया तो बहुमत में अंधे यही नेता जमानत बचाने को तरसेंगे।

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अस्तित्व बचाने उतरेंगे सड़को पर

सभी ने इस आंदोलन को ‘अस्तित्व बचाओ’ आंदोलन का नाम दिया है जिसमे यह निश्चित ककिया गया कि 10 अगस्त को शाम 4:30 बजे मशाल जुलूस गांधी पार्क से कचहरी तक निकाला जाएगा और जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति तथा सभापति लोकसभा एवम राज्यसभा को संबोधित ज्ञापन सौपा जाएगा। जुलूस संवैधानिक तरीके से निकाला जाएगा। इन संगठनों के अलावा अग्रवाल समाज, कायस्थ समाज, विश्वकर्मा समाज आदि गैर दलित संगठनों का समर्थन प्राप्त है। बैठक में रजनीश मिश्रा, रामावतार यादव, वैभव सिंह, अमित मोहन पांडेय, मोंटी बागची नागेंद्र कुशवाहा, अंजनी कुशवाहा, मुश्ताक अली आदि नेता उपस्थित रहे।

अस्तित्व बचाओ आंदोलन की प्रमुख मांगो में-

1- माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू किया जाय।

2- एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए फर्जी मुकद्दमा करने वाले पर कठोर करवाई की जाय। सरकार द्वारा प्राप्त सहायता राशि की वसूली की जाय।

3- गवाही से मुकरने पर अर्थ दण्ड तथा जेल दोनों किया जाय।

4- सरकारी सेवा में पदोन्नति को पूर्णतया समाप्त किया जाय, योग्यता तथा वरीयता को प्राथमिकता दी जाय।