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चंद्रग्रहण शुरू, तमाम मंदिरों के पट बंदकर भजन-कीर्तन

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गाजीपुर। चंद्रग्रहण के कारण बुधवार को मंगला आरती के बाद मंदिरों के पट बंद हो गए। अयोध्या, मथुरा समेत उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख मंदिरों के परिसर में भजन कीर्तन शुरू है। ग्रहण का समय सायं 5:35 से रात्रि 8:42 बजे के बीच का है लेकिन सूतक ग्रहण काल शुरू होने से नौ घंटा पूर्व ही शुरू हो गया है। सूतक लगने के पूर्व ही पूजन-अर्चन के साथ मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं। मंदिरों के पट भले ही बंद हों लेकिन भजन कीर्तन चल रहे हैं। हालांकि पुष्टिमार्गी मंदिरों में पट खुले हैं। अयोध्या में रामलला और मथुरा में राधाकृष्ण दर्शन की लालसा अधूरी रही । यही हाल बाबा विश्वनाथ के दर्शन की इच्छा रखने वालों का होगा। यही हाल यूपी के अन्य मंदिरों का होगा।

अयोध्या में महंत रामचंद्रदास के अनुसार ग्रहण के संक्रमण से बचाने के लिए खाद्यान्न में तुलसी का पत्र अथवा कुश डालकर रखें। बच्चों, वृद्धों एवं रोगियों को छोड़कर बाकी लोग ग्रहण काल में खाने-पीने से बचें। इस बीच गुरुमंत्र एवं ईष्ट मंत्र का जाप कर उसे मलिनता से बचाने का संकल्प भी पूरा करें। आज वृंदावन में मंदिर भोर में ही पूजा पाठ के बाद बंद कर दिए है। इससे भक्तों को ठाकुर जी के दर्शन नहीं मिल सकेंगे। ठा. बांकेबिहारी मंदिर में भी सुबह पांच बजे ठाकुरजी के पट खुले और सेवा के बाद सुबह आठ बजे बंद कर दिए गए। मथुरा में बांकेबिहारी मंदिर प्रबंधक मुनीश कुमार शर्मा ने बताया कि 31 जनवरी सुबह पांच बजे मंदिर के पट खुलेंगे। 5.10 बजे श्रृंगार आरती और 5.15 बजे पर्दा डालने के बाद राजभोग सेवा और राजभोग आरती 5.55 बजे होने के बाद और 6 बजे पट बंद कर दिए गए। चंद्रग्रहण के दौरान और सूतककाल के दौरान सभी मंदिर, आश्रम और मठों में दर्शन भले बंद हो लेकिन श्रद्धालु भजन-कीर्तन में लीन हैं।

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