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दुधमुंही बच्ची के रोने से परेशान निर्मोही मां ने ले ली उसकी जान

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नई दिल्‍ली। पूर्वी दिल्‍ली के ईस्ट विनोद नगर में मां की ममता को कलंकित और झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है। यह घटना 25 दिन की बच्‍ची को कूड़ाघर में फेंककर जान लेने की है। इस मामले में नन्‍ही जान का कसूर केवल इतना था कि वो रात को रोती थी और उसके रोने से मां सो नहीं पाती थी। परेशान कलयुगी मां ने 25 दिनों की अपनी दुधमुंही बच्ची को कूड़ाघर में सबसे नजरें छुपाकर फेंक दिया। गंभीर चोट से बच्‍ची की मौत हो गई।

मां ने की गुनाह कबूल

मामले का खुलासा होने के बाद बच्‍ची की मां ने गुनाह कबूल कर लिया है। पुलिस से पूछताछ में 25 वर्षीय मां नेहा तिवारी ने बताया कि मेरी बच्‍ची बहुत रोती थी। उसके रोने की वजह से वह सो नहीं पाती थी। मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई थी। बच्‍ची के रोने से परेशान होकर मैंने उसे शाम के समय कूड़ाघर में फेंक दिया। सिर में गंभीर चोटें आने की वजह से बच्‍ची वहां पर तड़पती रही। बच्‍ची के चिल्‍लाने के आवाज सुनकर पुलिस भी मौके पर पहुंची। उसे अस्‍पताल में भर्ती कराया गया। अस्‍पताल में उसका आपरेशन हुआ। लेकिन तमाम जद्दोजहद के बावजूद शनिवार सुबह उसके सांसों ने दामन छोड़ दिया। इस बीच कलयुगी मां बेटी के गुम होने का नाटक करती रही। लेकिन पुलिस की जांच में उसकी चालाकी पकड़ी गई।

निर्मोही मां गिरफ्तार

दिल्‍ली पुलिस ने आरोपी मां 25 वर्षीय नेहा तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है और उसने अपना जुर्म भी कबूल कर लिया है। वह कानपुर की रहने वाली है। वह अपने पति सौरभ तिवारी के साथ ईस्ट विनोद नगर पूर्वी दिल्‍ली में रहती है। सौरभ ट्रेवल एजेंट हैं और घर से ही काम करते हैं, जबकि नेहा गृहिणी है।

13 साल के बच्‍चे ने खोला राज

दरअसल जब नेहा बच्ची को कूड़ाघर में फेंक रही थी तो 13 साल का एक बच्चा सारा घटनाक्रम देख रहा था, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि बच्ची को फेंका जा रहा है। जब वहां पर एक बच्ची के होने की सूचना पाकर पुलिस वहां पहुंची तो बच्चे ने सारी कहानी बयां कर दी। उसने बताया कि लाल नाइटी पहनी महिला ने बच्ची को फेंका है। उसने हुलिया भी बताया। इसी आधार पर पुलिस ने नेहा को हिरासत में लिया। तब तक नेहा भी उसी कपड़े में थी। कड़ाई से पूछताछ में उसने जुर्म स्वीकार कर लिया। पुलिस ने पहले हत्या की कोशिश का मामला दर्ज किया, लेकिन बच्ची की मौत के बाद हत्या की धारा जोड़ दी गई।

बच्‍ची थी पहली संतान

सौरभ-नेहा की यह पहली संतान थी। बच्ची की देखभाल के लिए सौरभ की अपनी मां को कानपुर से दिल्ली ले आया था। शुक्रवार शाम सौरभ अपनी मां के साथ कहीं बाहर गए थे। शाम करीब सवा सात बजे जब लौटे तो दरवाजा बाहर से बंद था। तभी नेहा रोते हुए पहुंची और बच्ची नहीं मिलने की जानकारी दी। पुलिस तक मामला पहुंचा और जांच के दौरान पुलिस पास के कूड़ाघर में बच्‍ची जख्मी हालत में मिली। पुलिस ने उसे लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल पहुंचाया, जहां से जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां बच्ची के सिर का ऑपरेशन किया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।