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पूर्व भाजपा विधायक कृष्णानंद राय के हत्यारोपी मुन्ना बजरंगी की जेल में गोली मार कर हत्या

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गाजीपुर। माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के खासम-खास माने जाने वाले पूर्वांचल के कुख्यात डॉन प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या कर दी गई। आज पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के आरोप में बागपत कोर्ट में मुन्ना बजरंगी की पेशी होनी थी। मुन्ना बजरंगी को रविवार झांसी जेल से बागपत लाया गया था। उसे तन्हाई बैरक में कुख्यात सुनील राठी ओर विक्की सुंहेड़ा के साथ रखा गया था। जेल में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई। जेल में माफिया डॉन की हत्या से अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। बागपत जेल में तैनात संतरी के मुताबिक, वह सुबह 6 बजे जेल पास गस्त कर रहे थे, तभी लगातार कई गोली चलने की आवाज आई। कुछ देर बाद जानकारी मिली कि मुन्ना बजरंगी की हत्या हो गई। शव अभी जेल में ही है। अधिकारियों के आने के बाद भी निकल जाएगा शव।वहीं, डीएम ऋषिरेंद्र कुमार भी जिला जेल पर पहुंचे हैं और जांच शुरू हो चकी है।

एसटीएफ पर लगाया था हत्या की साजिश रचने का आरोप

सप्ताह भर पहले मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने लखनऊ प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस कर स्पेशल टास्क फोर्ट (STF) के अफसरों पर मुन्ना बजरंगी की हत्या की साज़िश रचने का आरोप लगाया था। इस हत्याकांड से पुलिस जेल और अपराध जगत में हड़कंप मच गया है। घटना की सूचना पा कर पुलिस और जेल विभाग के वरिष्ठ अफसर बागपत पहुंच रहे हैं।

मुख्तार अंसारी का माना जाता था खास

पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया था। यह गैंग मऊ से संचालित हो रहा था, लेकिन इसका असर पूरे पूर्वांचल पर था।

कौन है मुन्ना बजरंगी

मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है,  उसका जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था। उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना संजोए थे, लेकिन प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी ने उनके अरमानों को कुचल दिया। जानकारी के मुताबिक, उसने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी, किशोर अवस्था तक आते आते उसे कई ऐसे शौक लग गए जो उसे जुर्म की दुनिया में ले जाने के लिए काफी थे।

हथियार रखने का शौक था

मुन्ना को हथियार रखने का बड़ा शौक था। बताया जाता है कि वह फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था। इसी के चलते 17 साल की नाबालिग उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद मुन्ना ने कभी पलटकर नहीं देखा. वह जरायम के दलदल में धंसता चला गया।

भाजपा विधायक की हत्या में भी था शामिल

कहा जाता है कि मुन्ना बजरंगी ने मुख्तार अंसारी से फरमान मिल जाने के बाद भाजपा विधायक कृष्णानंद राय को खत्म करने की साजिश रची थी और फिर 29 नवंबर, 2005 को माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के कहने पर मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय को दिन दहाड़े मौत की नींद सुला दिया था। घटना के मुताबिक, उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लखनऊ हाइवे पर कृष्णानंद राय की दो गाड़ियों पर एके 47 से 400 गोलियां बरसाईं थीं। इस हमले में गाजीपुर से विधायक कृष्णानंद राय के अलावा उनके साथ चल रहे 6 अन्य लोग भी मारे गए थे। इस हत्याकांड ने सूबे के सियासी हलकों में हलचल मचा दी थी। हर कोई मुन्ना बजरंगी के नाम से खौफ खाने लगा था और इस हत्या को अंजाम देने के बाद वह मोस्ट वॉन्टेड बन गया था।