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भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने बंदूक नियंत्रण कानूनों में बदलाव का किया आह्वान

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वाशिंगटन। लास वेगास में फायरिंग की घटना के बाद अमेरिका में बंदूक संस्कृति पर नियंत्रण को लेकर बहस तेज हो गई है। भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने अमेरिकी बंदूक नियंत्रण कानूनों में बदलाव का आह्वान किया है।

अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा में बोलते हुए महिला डेमोक्रेट सांसद प्रमिला जयपाल ने कहा कि बंदूक हिंसा सार्वजनिक स्वास्थ्य का संकट है जो अब तक हजारों निर्दोष लोगों की जान ले चुका है। इस समस्या के समाधान के लिए संसद को हरसंभव प्रयास करना चाहिए। अमेरिकी जनता इससे परेशान है, लेकिन बंदूकों के पक्षधर जनता की बजाय अपने लाभ को वरीयता दे रहे हैं। हथियार रखने का अधिकार देने वाले देश के संस्थापकों का इरादा कतई ऐसा नहीं था।

उन्होंने कहा, ‘अधिकारों के साथ जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि बंदूक बिक्री से जुड़े कानूनों की खामियों को खत्म करें। ऐसे कानून बनाएं जिससे बच्चे और गंभीर मानसिक बीमारियों के शिकार लोग बंदूक हासिल न कर सकें। मानसिक स्वास्थ्य के लिए धन की व्यवस्था करें और साइलेंसर खरीद को आसान बनाने की किसी भी कोशिश का विरोध करें।’ प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी गई पहली भारतीय-अमेरिकी महिला जयपाल ने कहा कि बंदूक रखने वाले 87 फीसद लोग और 74 फीसद नॉन रेजीडेंट एलियन (एनआरए) ऐसे किसी भी कदम का समर्थन करते हैं जो आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों को हथियार हासिल करने से रोकता हो। उन्होंने कहा कि अब बहुत हो चुका, अब कार्रवाई कीजिए।

एक अन्य भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट सांसद एमी बेरा (कैलीफोर्निया) ने कहा कि किसी भी समुदाय में मूवी देखने जाने, किसी कंसर्ट में जाने या अपने बच्चे को स्कूल भेजने में भय का अनुभव नहीं होना चाहिए। इलीनोइस से भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट सांसद राजा कृष्णामूर्ति ने कहा, ‘उम्मीद है कि ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए हम सब मिलकर काम करेंगे।’

विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लास वेगास की घटना को पूरी तरह शैतानी कृत्य बताए जाने के बावजूद देश की बंदूक समर्थक और विरोधी लॉबी के बीच मतभेदों में कोई कमी आएगी। इसकी वजह यह है कि ट्रंप का चुनाव अभियान बंदूक नियंत्रण कानून के विरोध पर ही केंद्रित था। सोमवार की घटना के बाद भी अपने संदेश में उन्होंने ऐसे किसी कानून को लाने की मंशा जाहिर नहीं की। इसके अलावा पिछले हफ्ते ही रिपब्लिकन सांसद ऐसे विधेयक के पक्ष में मतदान करने की योजना बना रहे थे जो बंदूक संस्कृति से जुड़े कानून को कड़ा करने की बजाय उसे शिथिल बनाता है।

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