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भू-माफियाओं से मिलकर पट्टे की जमीन कब्जा कर रहे चेयरमैन, नगरवासियों ने दाखिल ख़ारिज में लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

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गाजीपुर। नगरपालिका परिषद की मिलीभगत से कपूरपुर और मिश्रबाजार क्षेत्र के जमीन व मकानों पर भू-माफियाओं की नजर है, जबकि काबिज दुकानदारो एवं निवासियों ने 99 वर्ष का पट्टा करा रखा था। जिसे नगरपालिका चेयरमैन ने भू माफियाओं की मिलीभगत से सभी नियमो को ताख पर रख पुराने नाम काटकर दूसरों के नाम करा भू माफियाओं को हस्तांतरित करने की योजना बना रखी है। ऐसा आरोप लगाते हुए नगरपालिका के पूर्व प्रत्याशी एवं प्रमुख सामजसेवी विवेक सिंह शम्मी के नेतृत्व में सैकड़ो युवाओ का एक प्रतिनिधि मंडल उपजिलाधिकारी शिवशरणप्पा से मिला।

चेयरमैन का भू माफियाओं से है पुराना याराना

प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम को अवगत कराया कि भू माफिया नगरपालिका चेयरमैन की मिलीभगत से इस क्षेत्र के करोड़ों की कीमती जमीन को कब्जा करना चाहते हैं। जिससे वर्तमान में काबिज दुकानदार व निवासी काफी भयभीत हैं। उन्होने उप जिलाधिकारी को बताया कि सभी मुहल्लेवासियों का नगरपालिका द्वारा 99 साल का पट्टा किया गया है। नगरपालिका परिषद के वर्तमान चेयरमैन ने भू माफियाओं से मिलीभगत कर सभी के नाम काटकर अवैध तरीके से दूसरे के नाम पर जमीन व मकान कब्‍जा कराने की नियत से सभी क्षेत्रवासियों को नोटिस जारी किया गया है तथा आपत्ति की मांग की गयी है। जिसपर सभी को घोर आपत्ति है।

चेयरमैन द्वारा खारिज दाखिल करना पूर्ण रुप से असंवैधानिक

शम्मी सिंह ने एसडीएम को बताया कि बिना किसी जानकारी व नोटिस के सभी का नाम काटकर नगरपालिका की मिलीभगत से अवैध भू-माफियाओं का नाम अंकित करने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान चेयरमैन द्वारा खारिज दाखिल कार्य करना पूर्ण रुप से असंवैधानिक कार्य है। जिसे तत्काल प्रभाव में लेकर रोका जाना आवश्यक है। उन्होने एसडीएम से मांग किया कि दोषियों के खिलाफ जांच कराकर सख्त‍ कार्यवाही की जाये और दशकों से रह रहे 35 परिवार को न्याय दिलाया जाये।

दाखिल ख़ारिज के नाम पर किया जा रहा करोड़ों का वारा न्यारा

शहर वासियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि चेयरमैन के कारखास को बिना सुविधा शुल्क कोई दाखिल खारिज नहीं हो रहे है। अकारण ही मामले को लटकाया जा रहा है, पूछने पर कारखास से सपर्क करने को कहा जाता है और सम्पर्क करते तथा सुविधा शुल्क देते ही असाधारण से असाधारण कार्य को भी मिंटो में साधारण बना दिया जाता है। दाखिल ख़ारिज के नाम पर करोड़ों का वारा न्यारा किया जा रहा है। इस संबंध में चेयरमैन तथा उनके प्रतिनिधि से सम्पर्क करने की कोशिस की गयी पर सम्पर्क नहीं हो पाया।