काशी के डोम राजा का निधन

काशी के डोम राजा का निधन

वाराणसी : काशी के डोम राजा जगदीश चौधरी का मंगलवार की सुबह निधन हो गया. वाराणसी के सिगरा स्थित निजी अस्पताल में इलाज के दौरान डोम राजा ने आखिरी सांसें लीं. परिजनों के मुताबित जांघ में घाव के कारण कई महीनों से उनका इलाज चल रहा था और मंगलवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई. इसके बाद उन्हें में अस्पताल में भर्ती कराया गया और भर्ती होने के कुछ समय के बाद ही उनकी मौत हो गई ।

पीएम मोदी ने जताया शोक

काशी के डोमराजा के निधन पर पीएम मोदी ने भी शोक संवेदनाएं प्रकट की. पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा कि वाराणसी के डोम राजा जगदीश चौधरी जी के निधन से अत्यंत दुख पहुंचा है. वे काशी की संस्कृति में रचे-बसे थे और वहां की सनातन परंपरा के संवाहक रहे. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और परिजनों को इस पीड़ा को सहने की शक्ति दे। वहीं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने डोमराजा को श्रद्धांजलि देते हुए अपने ट्वीट में कहा, ‘सामाजिक समरसता की भावना के प्रतीक पुरुष, काशीवासी डोमराजा श्री जगदीश चौधरी जी का निधन अत्यंत दुःखद है. श्री जगदीश चौधरी जी का कैलाशगमन सम्पूर्ण भारतीय समाज की एक बड़ी क्षति है. भारतीय समाज की एक बड़ी क्षति है. बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना है कि आपको अपने परमधाम में स्थान प्रदान करें ।

कौन होते हैं  डोम राजा

हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि पवित्र नगरी काशी में अंतिम समय बिताने से जीवन-मृत्यु के बंधन से छुटकारा मिल जाता है. इस लिए बड़ी संख्या में लोग बनारस पहुंचते हैं. लोग मानते हैं कि यहां आखिरी सांस लेने वालों को मोक्ष मिलता है और वह जन्म मरण के बंधन से छूट जाता है. बता दें कि वाराणसी में मर्णिकर्णिका और हरिश्चचन्द्र इन दो घाटो पर अंतिम संस्कार होता है. इन दोनों घाटों पर अंतिम संस्कार करवाने का काम सिर्फ डोम जाति के लोग करवाते हैं. इन्हें डोम राजा भी कहा जाता है. जगदीश राजा चौधरी भी उसी डोम समुदाय से आते थें जो वाराणसी में हिदुओं का अंतिम संस्कार करवाने का काम करते हैं. हिन्दू परंपराओं के मुताबिक वाराणसी भगवान शिव द्वारा बसाया गया एक शहर है. यहां पर मरने और अंतिम संस्कार होने वाले व्यक्ति को मोक्ष मिल जाता है. ।

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