सजा मां का दरबार, लगेगी श्रद्धालुओं की कतार

सजा मां का दरबार, लगेगी श्रद्धालुओं की कतार

गाजीपुर। या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। शारदीय नवरात्र की शुरूआत 17 अक्टूबर (शनिवार) से हो रही है। नौ दिनों तक चलने वाले मां शेरावाली की पूजन-अर्चन की तैयारी श्रद्धालुओं द्वारा शुरु कर दी गई है। नवरात्र के पहले दिन गहमर स्थित मां कामाख्या धाम, करीमुद्दीनपुर स्थित मां कष्टहरणी देवी, दिलदारनगर स्थित शायर माई, रेवतीपुर स्थित मां भगवती देवी, बहादुरगंज स्थित मां चंडी धाम, सैदपुर स्थित काली मंदिर, मुहम्मदाबाद स्थित मनोकामना देवी सहित जिले के अन्य प्रसिद्ध देवी मंदिरों में नवरात्र के पहले दिन भक्तों की भीड़ उमड़ेगा। भक्त मां की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

गहमर- मां कामाख्या देवी

एशिया के सबसे बड़े गांव गहमर स्थित आदि शक्ति मां कामाख्या धाम पूर्वांचल के लोगों के आस्था एवं विश्वास का केंद्र है। शक्ति पीठों में अलग महत्व रखने वाला यह धाम अपने आप में तमाम पौराणिक इतिहास समेटे हुए है। कहां जाता है कि यहां जमदग्नि, विश्वामित्र सरीखे ऋषि-मुनियों का सत्संग समागम हुआ करता था। विश्वमित्र ने यहां एक महायज्ञ भी किया था। मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने यही से आगे बढ़कर बक्सर में ताड़का नामक राक्षसी का वध किया था। मंदिर की स्थापना के बारे में कहां जाता है कि पूर्व काल में फतेहपुर सिकरी में सिकरवार राजकुल पितामह खाबड़ जी महाराज ने कामगिरी पर्वत पर जाकर मां कामाख्या देवी की घोर तपस्या की थी और उनकी तपस्या से प्रसन्न मां कामाख्या ने कालांतर तक सिकरवार वंश की रक्षा करने का वरदान दिया था। वर्ष 1840 तक मंदिर में खंडित मूर्तियों की ही पूजा होती रही। 1841 में गहमर के ही एक स्वर्णकार तेजमन ने मनोकामना पूरी होने के बाद इस मंदिर के पुर्ननिर्माण का वीणा उठाया। वर्तमान समय में मां कामाख्या सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां मंदिर परिसर में स्थापित हैं। शारदीय एवं वासंतिक नवरात्र में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। ऐसी मान्यता है कि मां के दरबार से कोई भक्त खाली हाथ नहीं जाता। उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।

करीमुद्दीनपुर- मां कष्टहरणी भवानी

मां कष्टहरणी भवानी का मंदिर आज भी लोगों के आस्था एवं विश्वास का केंद्र बना हुआ है। नवरात्र के मौके पर क्षेत्र ही नहीं, आसपास जिलों के लोग भी मां के दरबार में मत्था टेकने के लिए आते है। सच्चे मन से पूजा करने पर भक्तों की मनोकामना अवश्य पूरी होती है। मां का मंदिर गाजीपुर-मुहम्मदाबाद, चितबड़ागांव-बलिया मार्ग करीमुद्दीनपुर थाना के पास स्थित है। किवदंतियों के अनुसार द्वापर युग में पांडव अज्ञातवास के दौरान कुल गुरु धौम्य ऋषि एवं राजा युधिष्ठिर तथा द्रोपदी के साथ यहां आए थे और मां का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद लिया था। एक अन्य कथा के अनुसार लगभग चार सौ वर्ष पहले अघोरेश्वर बाब कीनाराम की विनती और पूजा से प्रसन्न होकर मां भगवती कष्टहरणी ने स्वयं कीनाराम को प्रसाद प्रदान कर पहली सिद्धि से परिपूर्ण किया था। श्री राम, लक्ष्मण तथा विश्वामित्र ने बक्सर जाते समय यहां विश्राम किया था।

adminpurvanchal

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