उसियां से है मेरा खून का रिश्ता है : ओमप्रकाश सिंह

उसियां से है मेरा खून का रिश्ता है : ओमप्रकाश सिंह

– सम्मान समारोह आयोजित कर पूर्व पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह को कि गया सम्मानित

– भाजपा सरकार पर साधा निशाना, कहा : जिम्मेदार मस्त, जनता झेल रही महंगाई का दंश

गाजीपुर। उसियां गांव में बुधवार की शाम एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जहां पूर्व पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह को फूलमाला व अंगबस्त्र प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया गया। साथ ही आने वाले विधानसभा चुनाव में सहयोग देकर प्रदेश के पंचायत में भेजने का वादा किया गया। संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि जब अपने लोग स्वागत करते हैं, तो दिल को काफी सुकून मिलता है। इससे रिश्ता मजबूत होता है। कहा कि इस गांव से दिल व खून का रिश्ता है। इस रिश्ते का जीवन-पर्यंत निर्वहन करता रहूंगा। मेरे न रहने के बाद ही इस इलाके के लोगों पर आंच आ सकता है। हमलोगों की लड़ाई जाति, मजहब से नहीं बल्कि हुकूमत से है। इसलिए 22 चूके तो 24 भी हाथ से निकल जायेगा। नौजवानों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा ही देश के भविष्य हैं। इसलिए युवाओं को बेहतर कर्म करते हुए जुल्म के खिलाफ लड़ना चाहिए। आज देश बेरोजगारी, महंगाई, कुशासन, भ्रष्टाचार से जूझ रहा है, लेकिन नौजवान चुप बैठे हैं। हुकूमत के खिलाफ जब तक युवा संगठित नहीं होंगे, तो व्यवस्थाएं बेहतर नहीं हो सकती हैं। भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता महंगाई का दंश झेल रही है, लेकिन जिम्मेदार मस्त हो रहे हैं। आज पेट्रोल, डीजल, शिक्षा, चिकित्सा, खाद्य वस्तु, भोजन सभी महंगे हो गये हैं और सरकार चुप्पी साधे हुए है। पुलिसिंग बेलगाम हो गई है। चारों तरफ भ्रष्टाचार का बोल बाला हो गया है। कहा कि समाजवादी इतिहास बनाने का कार्य करते हैं। पिछले कार्यकाल में जितने भी विकास के कार्य हुए हैं, वह अविस्मरणीय है। प्रदेश का विकास करने के लिए सभी को एकजुट होना आवश्यक है। पूर्व मंत्री प्रतिनिधि मन्नू सिंह ने सत्ता पक्ष में रहते हुए बिजली, सड़क, पानी, नहर, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। इस दौरान विधान सभा अध्यक्ष अनिल यादव, प्रबुद्ध प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष जमालुद्दीन खां, पूर्व प्रधान जामा खां, खालिद अमीर, सुखपाल यादव, आजाद प्रधान, श्रीकृष्ण मौर्य, मुस्ताक खां, दुर्गा चौरसिया, हेराम सिंह, लक्ष्मण कुशवाहा, बेचन खां, हेशामुद्दीन खां, भोलू खां, तौकीर खां, बबलू सिंह, रजनीकांत यादव आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता रमाशंकर राजभर व संचालन गुलाम मजहर खां ने किया।

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