पंचतत्व में विलीन हो गए वरिष्ठ अधिवक्ता रामअधार राय

पंचतत्व में विलीन हो गए वरिष्ठ अधिवक्ता रामअधार राय

– पूर्व विधायक कृष्णानंद राय हत्याकाण्ड के थे वकील, लेकिन सलाम करते थे अफजाल और मुख्तार अंसारी भी

– सफाई का गवाह बनकर छुड़ा लिए थे लोकतन्त्र सेनानी कल्याण समिति के संयोजक धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव को

– चौतरफा शोक का माहौल, न्यायिक कार्य से विरत हो गए अधिवक्ता

गाज़ीपुर। वरिष्ठ अधिवक्ता रामअधार राय शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। 89 वर्षीय रामअधार राय इधर कई दिनों से बीमार चल रहे थे। अचानक स्थिति गंभीर होने पर गुरुवार को उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना से हर तरफ शोक छा गया वहीं शुक्रवार को अधिवक्ता न्यायायिक कार्यों से विरत रहे। शहर के स्टीमर घाट स्थित उनके आवास पर भीड़ लगी रही। उनका जन्म 1932 में रेवतीपुर ग्राम में हुआ था। जहां 10 दिसम्बर को उनका पार्थिव शरीर शहर के श्मशानघाट पर अंतिम संस्कार किया गया। कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे रामअधार राय विधायक कृष्णानन्द राय हत्याकाण्ड के अधिवक्ता भी थे, लेकिन सांसद अफजाल अंसारी और विधायक मुख्तार अंसारी भी उन्हें सामने पड़ने पर अवश्य सलाम करते थे। वर्ष 1974 में जिले की छात्र युवा राजनीति को झकझोर देने वाले रेवतीपुर कांड में 43 डीआईआर, 7 नेशनल क्रिमिनल अमेंडमेंट एक्ट और 120-बी जैसी गंभीर धारा में बंद वर्तमान में साहित्यकार एवं वरिष्ठ पत्रकार और लोकतन्त्र सेनानी कल्याण समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक धीरेन्द्रनाथ श्रीवास्तव को जेल ट्रायल के दौरान स्वतः हस्तक्षेप कर सफाई के गवाह के रूप में नहीं पेश किये होते, तो आज वह जेल में ही रहे होते। उनके बयान के बाद इस मुकदमें का रुख पलट गया और धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव बाइज्जत बरी हो गए। रामअधार राय 1960 में वकील बने और 1966 में एडवोकेट हुए और देखते ही देखते उनकी गिनती जिले के अच्छे अधिवक्ताओं में होने लगी। वकालत उनके रगों में था। उनके पिता राजनारायण राय जिले के नामी मुख़्तार थे। पिछले तीन दशक से रामअधार राय को न्याय की दुनियां में वह सम्मान हासिल है, जो बिरले पाते हैं। इसके बावजूद वह बहुत ही विनयी स्वभाव के थे। दो वर्ष पहले वरिष्ठ पत्रकार धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव, राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर- संसद में दो टूक, लोकबन्धु राजनारायण विचार पथ एक और अभी उम्मीद ज़िन्दा है, समेत अपनी पांच पुस्तकें उन्हें भेंट कर सम्मानित करने के लिए गाज़ीपुर आए थे। उनसे सम्मान ग्रहण करने की जगह गाज़ीपुर बार की तरफ से उन्हें ही सम्मानित करवा दिया गया। रामअधार राय वर्ष 1942 में दस वर्ष के थे। उस समय की एक घटना का जिक्र वह अक्सर करते थे। स्वराज इंडिया, गाज़ीपुर की ओर से दो वर्ष पहले युवाओं का एक जत्था रमेश यादव के नेतृत्व में उन्हें सम्मानित करने गया था। इस रामअधार राय सम्मान समारोह में 42 का संस्मरण साझा करते हुए कहा था कि अंग्रेजी पल्टन के कहर के बचने के लिए हमारे पिता हमलोगों को लेकर गांव के बाहर स्थित अपने बगीचे में टिके थे। लेकिन वहां बिच्छू ने उन्हें डंक मार दिया था। डंक की पीड़ा वह और उसे लेकर पिता की बेचैनी कभी नहीं भूलती है। क्या आपका परिवार भी अंग्रेजी शासन के टारगेट पर था? जवाब में श्री राय ने कहा था कि अमर शहीद डॉ. शिवपूजन राय के नेतृत्व में मुहम्मदाबाद में तिरंगा फहराए जाने के बाद पूरा शेरपुर और रेवतीपुर गांव अंग्रेजी पल्टन के निशाने पर था। गोरी पल्टन ने दोनों गांवों को लूटा, फूंका। हवाई अड्डा बनाने के लिए ईंट तक उठा ले गए। तिरंगा फहराने में शहीद हुए अमर शहीद बाबू वंशनारायन राय हमारे फूफा थे, इसलिए हम लोग भी निशाने पर थे। बाबू रामअधार राय आजादी के सत्तर वर्ष को लेकर निराश भी नहीं थे। इसे लेकर एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा था कि आजादी के बाद विकास तो हुआ है। घटी है, केवल ईमानदरी जो ठीक नहीं है। रामअधार राय के निधन से गाज़ीपुर ने एक ऐसे व्यकित्व को खो दिया, जो वर्ष 1942, 1974 के साथ ही वर्ष 2021 तक की सभी बड़ी घटनाओं का साक्षी रहे। उनके कमी पूरी नहीं की जा सकती है।

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