फाइलेरिया उन्मूलन के लिए स्वास्थ्यकर्मियों किया प्रशिक्षित

फाइलेरिया उन्मूलन के लिए स्वास्थ्यकर्मियों किया प्रशिक्षित

– हाथीपांव मरीजों को सुरक्षा व स्वच्छता के लिए दिया प्रशिक्षण

गाजीपुर। फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर सरकार निरंतर प्रयासरत है। फाइलेरिया से ग्रसित मरीजों के पैरों में सूजन आ जाने से उनका पैर हाथी के पैर के समान हो जाता है। ऐसे ही मरीजों की सुरक्षा व स्वच्छता के लिए गुरुवार को जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय में फाइलेरिया के मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केके वर्मा ने किया। प्रशिक्षण में फाइलेरिया के मरीजों के प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही मरीजों को सुरक्षा के लिए एमएमडीपी किट भी वितरित की गई। डब्ल्यूएचओ के जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ निशांत कुमार ने प्रशिक्षण दिया। डॉ निशांत ने बताया कि इस रोग में व्यक्ति के पैरों में इतनी सूजन आ जाती है कि उनका पैर हाथी के पैर के समान मोटा हो जाता है, इसलिए इस रोग को हाथी पांव भी कहते हैं। यह रोग मनुष्य के अंडकोष और हाथ-पैरों में अधिक होता है। फाइलेरिया रोग जिसे हाथी पांव या फील पांव भी कहते हैं, में अक्सर हाथ या पैर बहुत ज्यादा सूज जाते हैं। कभी पीड़ित व्यक्ति के हाथ, अंडकोष, स्तन या कभी अन्य अंग भी सूज सकते हैं। पाथ की डॉ सुचिता ने बताया कि फाइलेरिया रोग एक कृमिवाली बीमारी है। यह कृमि लसीका तंत्र की नलियों में होती है और उन्हें बंद कर देती है। यह फाइलेरिया बैंक्रॉफ्टी नामक विशेष प्रकार की कृमि द्वारा होता है। इसका प्रसार क्यूलेक्स नामक विशेष प्रकार के मच्छरों के काटने से होता है। इस कृमि का स्थायी स्थान लसीका वाहिनियां हैं, लेकिन यह निश्चित समय पर, विशेषकर रात्रि में रक्त में प्रवेश कर शरीर के अन्य अंगों में फैलते हैं। कभी कभी यह ज्वर तथा नसों में सूजन उत्पन्न कर देते हैं। यह सूजन घटती बढ़ती रहती है, लेकिन जब यह कृमि लसीका तंत्र की नलियों के अंदर मर जाते हैं, तब लसीकावाहिनियों का मार्ग सदा के लिए बंद हो जाता है और उस स्थान की त्वचा मोटी तथा कड़ी हो जाती है। लसीका वाहिनियों के मार्ग बंद हो जाने पर कोई भी औषधि अवरुद्ध लसीकामार्ग को नही खोल सकती। कुछ रोगियों में ऑपरेशन द्वारा लसीकावाहिनी का नया मार्ग बनाया जा सकता है। जिला मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण में आए मरीजों को अपने पैरों को कैसे सुरक्षित रखना है इसके बारे में बताया गया। एमएमडीपी किट ब्लॉक पर भी भेजी गईं हैं जहां अन्य मरीजों को भी वितरित की जाएगी। उन्होने बताया कि प्रत्येक गुरुवार की रात्रि में जिला मलेरिया कार्यालय पर फाइलेरिया की जांच नि:शुल्क की जाती है। फाइलेरिया के लक्षण दिखने पर यहाँ अपनी जांच नि:शुल्क कराकर दवा प्राप्त कर सकते हैं। फाइलेरिया के लक्षण – आमतौर पर फाइलेरिया के कोई लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, लेकिन बुखार, बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग और उसके आस-पास दर्द व सूजन की समस्या दिखाई देती है। इसके अलावा पैरों और हाथों में सूजन, हाथी पांव और हाइड्रोसिल (अंडकोषों की सूजन) भी फाइलेरिया के लक्षण हैं। इस बीमारी में हाथ और पैर हाथी के पांव जितने सूज जाते हैं इसलिए इस बीमारी को हाथीपांव कहा जाता है। फाइलेरिया संक्रमण के लक्षण कई सालों तक नजर नहीं आते। फाइलेरिया न सिर्फ व्यक्ति को दिव्यांग बना देती है बल्कि इससे मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। कार्यशाला में एसीएमओ डॉ डीपी सिन्हा, डॉ उमेश कुमार, डॉ एसडी वर्मा, डॉ मनोज कुमार सिंह के साथ ही विभागीय कर्मचारी मौजूद रहे।

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