वन विभाग की लापरवाही से जा सकती थी ग्रामीणों की जान

वन विभाग की लापरवाही से जा सकती थी ग्रामीणों की जान

गाजीपुर। नोनहरा थाना क्षेत्र के सुसुण्डी गांव में खेतों की कटाई के दौरान तेंदुआ देखा गया, जिसकी सूचना ग्रामीणों द्वारा तत्काल पुलिस विभाग समेत वन विभाग को दी गयी। सूचना पाकर नोनहरा पुलिस के साथ वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची पर घंटो समय बिताने के बाद कई किलोमीटर तक तेंदुआ न होने की बात बता कोरम पूरा कर वन विभाग के अधिकारी निकले वाले ही थे कि ग्रामीणों ने स्वयं ही मोर्चा खोल दिया और वन विभाग की मौजुदगी में ही तेंदुए को खोज मार गिराया। समय रहते वन विभाग द्वारा तेंदुए की जान बचाई जा सकती थी पर वन विभाग की लापरवाही के कारण दो और ग्रामीण तेंदुए के हमले से घायल हो गए, वही तेंदुए को जान गवानी पड़ी।

तेंदुए के हमले से घायल सुसुण्डी गांव निवासी हैदर अली ने गाजीपुर लाइव से ख़ास बातचीत में बताया कि महेंद्र राजभर सुबह अपने खेत में कटाई करने गया हुआ था। वही पास में खेल रहे बच्चे शेर-शेर चिल्लाते हुए भागे। जंगली जानवर की आशंका पर महेंद्र आगे बढ़ा तो सामने तेंदुए को बैठे पाया, भगाने के लिए उसने उसपर ईट चलना शुरू कर दिया पर तेंदुए ने उस पर हमला बोल दिया।

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घायल हैदर अली

हैदर ने आगे बताया कि शोर सुनकर लाठी डंडो से लैस ग्रामीण मौके की ओर बढ़े, जिससे तेंदुआ गांव के बाहर तालाब की ओर तेजी से भागा। तेंदुए के गांव में घुसे होने की सूचना ग्रामीणों ने फ़ौरन नोनहरा थाने समेत वन विभाग को दी पर मौके पर घंटो गुजारने पर भी वो तेंदुए को नहीं खोज पाए। दूरबीन लगा वन विभाग के अधिकारियो द्वारा कहा गया कि कई किलोमीटर तक कहि कोई तेंदुआ नहीं है, न ही उसके कोई निशान।

ग्रामीणों को वन विभाग पर तनिक भी भरोसा नहीं था क्योकि उन्होंने सक्षात अपनी मौत को सामने से देखा था। वन विभाग की बातो को नजरअंदाज कर ग्रामीणों ने स्वयं मोर्चा खोल दिया और शोर मचाते हुए तालाब की ओर लपके। शोर सुनकर तेंदुआ सरपत में से निकल कर भागा। घिरता देख उसने हैदर और विनोद पर हमला कर दिया, लेकिन ग्रामीणों ने उसे पीट पीट कर पस्त कर दिया। ग्रामीण उसे तब तक पीटते रहे जब तक उसकी साँसे नहीं थम गयी।

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ग्रामीणों का आरोप है कि इसके पूर्व भी वन विभाग को सूचना दी गयी थी पर विभाग ने उसे गंभीरता से नहीं लिया और आज भी बहाना बना निकल ही रहे थे कि ग्रामीणों ने स्वयं मोर्चा खोल दिया। जिसका परिणाम यह रहा की ग्रामीणों की जान जाते जाते बची वंही तेंदुए ने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों को आरोप था कि वन विभाग के अधिकारी वन संरक्षण छोड़ कोयला और लकड़ी लदे वाहनों पर विशेष नजर रखते है पर पकड़ते किसी को नहीं। ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम को जमकर लताड़ा।

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